वैक्सीन ही कोरोना का स्थायी इलाज है, मीडिया के साथ संवाद में बोले विशेषज्ञ चिकित्सक, भ्रांतियों का किया निवारण

  
Last Updated:  April 4, 2021 " 01:04 pm"

इंदौर : कोरोना वैक्सीन को लेकर तमाम भ्रांतियों के निवारण और उसके बेहद सुरक्षित व कारगर होने सम्बन्धी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कमिश्रर डॉ. पवन कुमार शर्मा ने सामयिक पहल की। उन्होंने शनिवार को तमाम मीडिया कर्मियों को अपने कार्यालय पर आमंत्रित किया और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ उनकी चर्चा कराई। इस टीम में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित, एमवायएच के डॉ. वीपी पांडे, हेमंत जैन और चेस्ट फीजिशियन डॉ. सलिल भार्गव शामिल थे। सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए इस चर्चा सत्र में डॉ. निशांत खरे भी मौजूद रहे।

प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताए वैक्सिनेशन के फायदे, भ्रांतियों का किया निवारण।

कमिश्नर डॉ. शर्मा द्वारा चर्चा सत्र की विषय वस्तु से अवगत कराने और स्वागत भाषण देने के बाद डॉ. हेमंत जैन ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कोरोना की वैक्सीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोरोना से लड़ने और बचने का वैक्सीन के अलावा कोई उपाय नहीं है। भारत में स्वदेश में ही निर्मित दो वैक्सीन लगाई जा रही है। एक है सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और दूसरी भारत बायोटेक की कोवाक्सिन। डीसीजीआई ने दोनों ही वैक्सीन को कई चरणों के क्लीनिकल ट्रॉयल के बाद इस्तेमाल की मंजूरी दी है।

दोनों वैक्सीन पूरीतरह सुरक्षित और कारगर है।

डीन डॉ. संजय दीक्षित और डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि कोविशील्ड व कोवाक्सिन दोनों ही वैक्सीन कोरोना से बचाव में बेहद कारगर हैं। उन्होंने कहा कि दोनों वैक्सीन पूरीतरह सुरक्षित हैं। इनको लगवाने से मामूली सा बुखार आ सकता है या हल्के कोई अन्य लक्षण उभर सकते हैं। पर इनसे घबराने जैसी कोई बात नहीं है। करोड़ों लोगों को अबतक ये वैक्सीन लग चुकी है। इससे गंभीर किस्म के साइड इफेक्ट का कोई मामला आज तक सामने नहीं आया है।

6 से 8 हफ्तों में लगेगा दूसरा डोज।

डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि कोविशील्ड का दूसरा डोज 6 से 8 हफ्ते में और कोवाक्सिन का 28 दिन बाद लगाना फायदेमंद होता है। दूसरा डोज लगवाने के 2 से 3 हफ्ते में कोरोना के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।उन्होंने कहा कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी किसी को कोरोना संक्रमण हो जाता है तो वह ज्यादा असरकारी नहीं होगा। डॉ. जैन ने कहा कि वैक्सीन ही कोरोना का स्थायी इलाज है।

81 फ़ीसदी है इफेक्टिव।

प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि दोनों वैक्सीन दोनों डोज लेने के बाद 81 फ़ीसदी इफेक्टिव पाई गई है। यह लंबे समय तक कोरोना से बचाव में कारगर है। हर व्यक्ति को यह वैक्सीन अवश्य लगवाना चाहिए।

गंभीर मरीजों में ही सिटी स्कैन की जरूरत।

डॉ. वीपी पांडे ने कहा कि हर कोरोना संक्रमित का सिटी स्कैन जरूरी नहीं होता। केवल गंभीर संक्रमित मरीजों में ही इसकी जरूरत होती है। 90 फ़ीसदी मरीजों प्राथमिक उपचार के बाद ठीक हो रहे हैं। किसी संक्रमित के साथ आप संपर्क में रहें भी हों तो 4 से 5 दिन में लक्षण नजर आते हैं। डॉ. पांडे ने कहा कि 70 से 80 फ़ीसदी कोरोना मरीजों का इलाज होम आइसोलेशन में ही किया जा रहा है। सांस संबंधी समस्या या गंभीर संक्रमण होने की दशा में एडमिट करने की जरूरत पड़ती है, अतः कोरोना के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू करवा लेना चाहिए। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, मरीज के ठीक होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

बुजुर्ग भी लगवाएं वैक्सीन।

डॉ. सलिल भार्गव और डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि 80+ बुजुर्गों के लिए भी यह दोनों वैक्सीन सेफ हैं। उन्हें भी कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। इसके अलावा जिन्हें किसी चीज से एलर्जी हो, उन्हें भी इस वैक्सीन को लगवाने में कोई खतरा नहीं है। इसी तरह हार्ट, किडनी या अन्य किसी गंभीर किस्म की बीमारी से ग्रसित लोगों भी वैक्सीन लगवानी चाहिए। क्योंकि कोरोना संक्रमण उनके लिए ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो सकता है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मीडियाकर्मियों के सवालों के भी
संतोषजनक जवाब दिए।

चर्चा सत्र का समापन करते हुए डॉ. निशांत खरे ने कहा कि हम स्वच्छता में नम्बर वन बन सकते हैं तो वैक्सिनेशन में भी यह तमगा हासिल कर सकते हैं। उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि वह अपना सामाजिक दायित्व निभाते हुए लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करें।
चर्चा सत्र में बताया गया कि इंदौर में 350 स्थानों पर वैक्सीन लगाई जा रही है। 45 वर्ष या उससे ऊपर के लोग इन सेंटर्स पर जाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं।

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