रिसर्च पर ध्यान नहीं देने से वैश्विक शैक्षिक परिदृश्य में हम पिछड़ गए – डॉ. धर

  
Last Updated:  September 14, 2022 " 02:27 pm"

64वे स्थापना दिवस पर अभ्यास मंडल ने जाल सभागृह में 64 दीप जलाएं।

पुराने 3 सदस्यों शरद बुलाख वसंत शिंत्रे और अशोक मित्तल का शॉल – श्रीफल से सम्मान किया।

राष्टीय शिक्षा नीति 2020,चुनौतियां एवं अवसर विषय पर व्याख्यान आयोजित।

इंदौर : आजादी के बाद देश में महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों की संख्या तो कई गुना बढ़ी,लेकिन गुणवता में हम बहुत पिछड़ गए। भारत का कोई भी शिक्षा संस्थान आज दुनिया के टॉप 100 शिक्षा संस्थानों में नहीं है।इसका एक बड़ा कारण हमारे यहां शोध और अनुसंधान पर ध्यान नहीं दिया जाना है।
ये विचार वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय,इंदौर के कुलपति डाॅ.उपिन्दर धर ने व्यक्त किए। वे अभ्यास मंडल के 64वे स्थापना दिवस पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता बतौर बोल रहें थे। विषय था ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 चुनौतियां और अवसर।’
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे सांसद शंकर लालवानी।

कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद लालवानी ,उपिन्दर धर,अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता,उपाध्यक्ष अशोक कोठारी,सचिव नेताजी मोहिते पीसी शर्मा और शफी शेख ने देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया।बाद में सभी श्रोता बिरादरी ने भी 64 दीप प्रज्वलित कर एक- दूसरे को स्थापना दिवस की बधाई दी।

संस्थापक सदस्यों का किया सम्मान।

इस मौके पर संस्था ने अपने पुराने 3 साथियों वसंत शिंत्रे,शरद बुलाख और अशोक मित्तल का शॉल – श्रीफल से सम्मान किया।

2035 तक होगा नई शिक्षा नीति का मुकम्मल क्रियान्वयन।

अपने संबोधन में उपिन्दर धर ने आगे कहा कि आजादी के समय देश में करीब 1500 कॉलेज और 20 विश्वविद्यालय थे। आज देश में 50 हजार महाविधालय और 1038 विश्वविद्यालय हैं। देश में 21आईआईटी और 19 आईं आईं एम हैं।

श्री धर ने कहा कि भारत में शिक्षा नीति की पहली कमेटी 1948 में डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में बनी थी। इसके बाद शिक्षा में सुधार के लिए 1964 में दौलत सिंह कोठारी कमेटी बनी। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. नरसिम्हाराव के कार्यकाल में भी एक कमेटी बनी थी। जुलाई 2019 में कस्तूरीराजन की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति बनी, जिसमें अवसर भी हैं और चुनौतियां भी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि नई शिक्षा नीति का पूरी तरह से क्रियान्वयन 2035 तक होगा।तब लक्ष्य है उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विधार्थियो का नामांकन आज से दुगुना करना।वर्तमान में 100 स्कूली बच्चों में से मात्र 27 बच्चे ही उच्च शिक्षा में प्रवेश ले पाते है,जो चिंतनीय है।

नई शिक्षा नीति के तहत कॉमर्स का विधार्थी साइंस का विषय भी ले सकता है।यदि किसी विधार्थी ने स्नातक की पढ़ाई अधूरी छोड़ दी तो उसकी वह पढ़ाई बेकार नहीं जाएगी,उस अवधि का उसे सर्टिफिकेट या डिप्लोमा अवश्य मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश में क्राइम इसलिए भी बढ़ रहे है कि मानविकी विषयों के प्रति हमारा ध्यान कम है।आज के बच्चों को मोरल वैल्यू और इथिक्स जैसे विषय पढ़ाने की जरूरत है।हर बच्चे की प्राथमिक शिक्षा मातृ भाषा में होना चाहिए।अंग्रेजी भी जरूरी है,क्योंकि हमारे बच्चे ग्लोबल वर्ल्ड में जा रहे है। हमारे बच्चों को अपनी संस्कृति और सभ्यता के बारे में भी जानना जरूरी है। यह सब नई शिक्षा नीति में शामिल है।
श्री धर ने उपस्थित श्रोताओं के प्रश्नों के संतोष जनक जवाब भी दिए।

सांसद लालवानी ने कहा कि अभ्यास मंडल ने शहर के विकास में मुख्य भूमिका निभाई इसके लिए वह साधुवाद का पात्र है।

अतिथि स्वागत वैशाली खरे,सुरेश उपाध्याय ,ग्रीष्मा त्रिवेदी, पीसी शर्मा,शफी शेख, सुनील मकोड़े ने किया। संचालन मनीषा गौर ने किया। ।उद्योगपति जगदीश वर्मा ने प्रतीक चिन्ह भेंट किए। आभार संस्था अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता ने माना।

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